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Saharsa Life TV : कोरोना लॉकडाउन : दिल्ली से सहरसा पहुंच गया जुगाड़ से, बिस्कुट और पानी पीकर चार दिनों में तय किया सफर


लॉकडाउन ने मजदूरों व बाहर फंसे कामगारों की जिंदगी में तूफान सा ला दिया। काम बंद होने के कारण एक तरफ भुखमरी की समस्या उत्पन्न हो गई है तो दूसरी तरफ सवारी नहीं मिलने के कारण घरों को लौटने में परेशानी हो रही है। शुक्रवार को जिले विभिन्न प्रखंडों के 16 मजदूर मुश्किल भरा सफर तय करते घर लौटे हैं। दिल्ली से बाइक की इंजन लगाकर ठेला से नवहट्टा के पांच मजदूर लौटे हैं।
हालांकि सहरसा पुलिस ने शंकर चौक से लाकर  सदर अस्पताल में भर्ती कराया। नवहट्टा निवासी मजदूर रामप्रवेश यादव,राजकुमार राम, सत्यम राम, रामचंद्र यादव व धनिक लाल ने बताया कि काम करने के लिए बनाई जुगाड़ गाड़ी को ही अपना सवारी गाड़ी बनाया। बिस्कुट और पानी पीकर चार दिनों में दिल्ली से सहरसा का सफर किया है। वहीं सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड की सिटानाबाद दक्षिणी पंचायत के इस्लामपुर गांव निवासी मो. जसीम 22 वर्ष, मो. हदीस 18 वर्ष मो. इरफान 18 वर्ष, मो. इजराफिल मो. ननकू ने बताया कि हम सभी पटना में राजमिस्त्री का काम महीनों से करते हैं। कंकड़बाग में भाड़े के मकान में रहते हैं। 
घर सिटानाबाद दक्षिणी पंचायत के इस्लामपुर में है। पटना में काम बंद हो चुका है। अपने परिवार के साथ इस संकट की घड़ी में रहने की इच्छा लेकर पैदल ही घर की ओर चले आए।वहीं देश में जारी लॉक डाउन के दौरान सात दिनों की मशक्कत के बाद महाराष्ट्र में काम करने वाले आधा दर्जन मजदूर महिषी के पूर्वी महादलित टोला पहुंचे। यात्रा के दौरान रेल, बस, पैदल और छोटे वाहनों का सहारा लिया। महिषी के दुलार सादा ने बताया कि महाराष्ट्र के डाउन क्षेत्र में रहकर मजदूरी का काम करते थे।
कोरोना के संक्रमण को लेकर देश में जारी लॉकडाउन के बाद काम बंद हो जाने के कारण वे सभी अपने घर वापस आने को चले। इन सभी की बांह पर मुहर लगा हुआ है। दुलार ने बताया कि रेलगाड़ी का सफर कर डाउन से नागपुर होते रांची आया। रांची से बस से पटना पहुंचाया गया। पटना से 24 घण्टे में पैदल यात्रा करते मुज्जफरपुर आया। वहां से घरवालों द्वारा भेजी गई गाड़ी से घर पहुंचा है। 
कोलकाता से पैदल चलकर पहुंचे भागलपुर
 कोलकाता से 512 किमी का सफर पैदल चलकर भागलपुर पहुंचे सहरसा सोनवर्षा के 23 लोगों का गर्मी और भूख से बुरा हाल था। शुक्रवार को चिलचिलाती धूप में बायपास और फिर विक्रमशिला पुल को पार करना उनके लिए चुनौती थी। किसी के पांव में छाले पड़ गए थे तो कोई लंगड़ा कर चल रहा था। शाम ढलते-ढलते इन्हें महेशखूंट पहुंचना है। रात में आराम के बाद ये लोग शनिवार को सहरसा के लिए निकलेंगे। हुगली जिले के नेताजी मोड़ भद्दोपट्टी में रहकर काम करने वाले दिलीप महतो बताते हैं कि 10 दिनों से कोई काम नहीं था। खाने के लिए कुछ नहीं मिल रहा था। जहां पर काम कर रहे थे, उसने जाने के लिए कह दिया। ट्रेन और बस नहीं चलने से उनलोगों ने पैदल ही घर पहुंचने को ठाना। 23 लोग एकजुट होकर निकल पड़े। रास्ते में बंगाल और झारखंड की पुलिस ने मदद की। खाने के लिए सामान दिया। 

रात में रुकने के लिए धर्मशाला की व्यवस्था कर दी। रंजन कुमार, सोने लाल, सुभाष, अमरजीत, अरुण महतो पत्थर-गिट्टी तोड़ने वाली मशीन पर काम करते हैं। उन्होंने बताया कि कोलकाता में बिहारी लोग खाने के लिए तरस रहे हैं। अगर हमलोग हिम्मत करके नहीं निकलते तो भूख से मर जाते। मजदूरों ने बताया कि पिछले आठ दिनों से एक रुपये भी नहीं कमाया हैं। इन आठ दिनों में बचत भी खत्म हो गई है। ऐसे में 14 अप्रैल तक परिवार को रोजी-रोटी के संकट का सामना करना पड़ सकता है।  ऐसे में कोई दूसरा विकल्प भी नहीं था।

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