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कर्नाटक और गोवा के घटनाक्रम से कमलनाथ सरकार सतर्क, 11 दिन में तीसरी बैठक

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कर्नाटक और गोवा के घटनाक्रम से कमलनाथ सरकार सतर्क, 11 दिन में तीसरी बैठक
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ (फाइल फोटो).
भोपाल: 
कर्नाटक और गोवा में घटे राजनीतिक घटनाक्रम के बीच मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार सतर्क नजर आ रही है. दरअसल विधानसभा सत्र के दौरान 11 दिनों में यह तीसरा मौका है जब कांग्रेस और सरकार को समर्थन दे रहे विधायक इकट्ठा हो रहे हैं. सात जुलाई, 11 जुलाई के बाद आज 17 जुलाई को एक बार फिर कांग्रेस और सरकार को समर्थन देने वाले विधायकों की बैठक मुख्यमंत्री निवास में बुलाई गई.
    
कांग्रेस को लगता है इसमें कुछ गलत नहीं है. गृहमंत्री बाला बच्चन ने कहा बजट पर चर्चा है, अनुदान मांगों पर, जिससे विधायक अपने इलाके की बात रख सकें. सरकार पर कोई खतरा नहीं है, आप वो बात छोड़ दीजिए.

वहीं उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने कहा लोकतंत्र, पार्टी का मुख्य भाग होता है अपने विधायकों के लिए नियम कायदे बनाना. नरेंद्र मोदी जी ने अपने सांसदों के लिए व्हिप जारी किया है बजट को लेकर हर पार्टी इस तरह के अधिकार का इस्तेमाल करती है. ये पॉजिटिव है, इसमें कुछ ग़लत नहीं है.
बीते 11 दिनों में ये तीसरा मौका है जब कमलनाथ विधायक दल की बैठक लेंगे. सबसे पहले सात जुलाई को विधायक दल की बैठक बुलाई गई थी. इसके बाद 11 जुलाई को मंत्री तुलसी सिलावट के बंगले पर मंत्रियों और विधायकों के लिए डिनर रखा गया और अब 17 जुलाई को एक बार फिर सीएम कमलनाथ के घर विधायक दल की बैठक रखी गई है.
बीजेपी ने बार-बार विधायक दल की बैठक बुलाने पर तंज कसा है. पूर्व सहकारिता मंत्री और बीजेपी विधायक विश्वास सारंग ने कहा जब असंतोष और अल्पमत की सरकार रहेगी तो यही भय होगा. उन्हें मालूम है गोवा का तूफान कर्नाटक होते हुए मध्यप्रदेश आने वाला है. हम नहीं गिराएंगे, सरकार अपने असंतोष के कारण गिरेगी इसलिए इस तरह के दबाव की राजनीति कर रहे हैं.    
मध्यप्रदेश विधानसभा में कांग्रेस के पास 114 विधायक हैं. वहीं उसे चार निर्दलीय, दो सपा और एक बसपा के विधायक का समर्थन हासिल है, जिसके चलते 230 विधायकों वाली विधानसभा में कमलनाथ सरकार के पास कुल 121 विधायक हैं जो बहुमत के आंकड़े से सिर्फ पांच विधायक ज्यादा है. वहीं बीजेपी के विधायकों की संख्या 108 है

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