भुवनेश्वर, एएनआइ। बिहार में एक्यूट इंसफलाइटिस सिंड्रोम(AES)या आम भाषा में चमकी बुखार के कारण हाहाकार मचा हुआ है। चमकी बुखार की वजह से बिहार के मुजफ्फरपुर में अबतक 112 बच्चों की मौत हो चुकी है। मुजफ्फरपुर में एक्यूट इंसफलाइटिस सिंड्रोम(AES) के फैलने के पीछे एक वजह बच्चों का लीची खाना बताया जा रहा है।मेडिकल विशेषज्ञों और साथ ही राज्य सरकार के मंत्रियों का भी मानना है कि बच्चों की मौत के पीछे लीची खाना एक वजह हो सकता है।बिहार और देश के अन्य उन भागों में एक्यूट इंसफलाइटिस सिंड्रोम(AES) फैल रहा है, इन सभी इलाकों में लीची बहुतायत में पाई जाती है।
इसको देखते हुए ओडिशा सरकार भी अलर्ट पर आ गई है। ओडिशा सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग ने खाद्य सुरक्षा आयुक्त को खास निर्देश जारी किए हैं। इसमें लीची में विषाक्त सामग्री का पता लगाने के लिए बाजार में बेची जा रही लीची के नमूने एकत्र करने और उसका परीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। लीची के बीज में मेथाईलीन प्रोपाइड ग्लाईसीन (एमसीपीजी) होता है। इसी केमिकल को बिहार में बच्चों की मौत के लिए ज़िम्मेदार माना जा रहा है।
मुजफ्फरपुर है 'लीची का कटोरा'
बिहार में एक्यूट इंसफलाइटिस सिंड्रोम(AES) से बच्चों की मौत के पीछे लीची को कारण बताने के पीछे कई वजहें हैं। मुजफ्फरपुर में इस बुखार का सबसे ज्यादा असर है। मुजफ्फरपुर को लीची का कटोरा कहा जाता है। पूरे देश में लीची की ज्यादातर आपूर्ति इसी इलाके से की जाती है। गृह मंत्रालय के डाटा के मुताबिक बिहार में 2017 में तीन लाख मीट्रिक टन लीची की पैदावर हुई थी।
क्या हैं एक्यूट इंसफलाइटिस सिंड्रोम (AES) के लक्षण ?
ये एक संक्रामक बीमारी है। इस बीमारी के वायरस शरीर में पहुंचते ही खून में मिल जाते हैं और तेजी से शरीर में इन वायरस की संख्या बढ़ने लगती है। शरीर में इस वायरस की संख्या बढ़ने पर ये खून में मिलकर मस्तिष्क तक पहुंच जाते हैं। मस्तिष्क में पहुंचने पर ये वायरस कोशिकाओं में सूजन पैदा कर देते हैं, जिस कारण शरीर का 'सेंट्रल नर्वस सिस्टम' खराब हो जाता है। इस बीमारी में बच्चे को लगातार तेज बुखार चढ़ा रहता है। बच्चे के शरीर में हमेशा दर्द रहता है।