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सीएम पटनायक ने बताया, कैसे तूफान फोनी से 'जीत' गया ओडिशा




तूफान के आने से पहले सरकार की सक्रियता और सेना की मुस्तैदी ने ओडिशा को काफी हद तक भयावह तूफान फोनी की तबाही से बचा लिया। इस तूफान में अब तक 12 लोगों की मौत की सूचना जरूर है लेकिन जिस तरह से इस तूफान ने रौद्र रूप धारण किया था, उससे अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए होते तो शायद यह आंकड़ा और अधिक हो सकता था।



भुवनेश्वर 
भारी बारिश और प्रचंड हवाओं के साथ चक्रवाती तूफान फोनी ने शुक्रवार को ओडिशा में तबाई जरूर मचाई पर, सरकार (राज्य और केंद्र) और प्रशासन की सतर्कता और तैयारी ने काफी हद तक सूबे को इस विनाशलीला से बचा दिया। समय से लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के साथ एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, नौसेना सहित सभी एजेंसियों की मुस्तैदी का लाभ मिला और ओडिशा भयंकर तूफान की तबाही से काफी हद तक खुद को बचाने में सफल रहा। 
शनिवार को सीएम नवीन पटनायक ने यह जानकारी दी कि 24 घंटे में रेकॉर्ड 1.2 मिलियन लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। उन्होंने बताया कि 3.2 लाख गंजम से, 1.3 लाख पुरी से और करीब 7000 रसोईघरों और 9000 शेल्टर का इंतजाम किया गया। यहां 45,000 से ज्यादा वॉलंटियर सहयोग में लगे हैं। 

अब तक 12 लोगों की गई जान 
उधर, अधिकारियों ने बताया कि 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रहे इस अत्यंत भयंकर चक्रवाती तूफान की वजह से शुक्रवार को पुरी में तेज बारिश और आंधी आयी। तूफान के कमजोर पड़ने और पश्चिम बंगाल में प्रवेश करने से पहले इसकी चपेट में आये कस्बों और गांवों में बहुत से घरों की छतें उड़ गयीं और कई घर पूरी तरह से बर्बाद हो गए। अधिकारियों ने कहा कि आपदा के कारण मरने वालों की संख्या शुक्रवार को आठ थी, जो मयूरभंज जिले में चार और लोगों के मारे जाने के बाद बढ़कर 12 हो गई। 

पीएम ने की पटनायक से बात 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से बात की और तटीय राज्य में चक्रवात आने के बाद की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की। प्रधानमंत्री ने राज्य सरकार को आश्वासन दिया कि केंद्र की तरफ से राज्य को लगातार सहायता मिलती रहेगी। 

अब पश्चिम बंगाल में अलर्ट 
बता दें कि ओडिशा से पश्चिम बंगाल की तरफ जा रहे इस तूफान से पश्चिम बंगाल में पूर्वी एवं पश्चिमी मिदनापुर, उत्तर एवं दक्षिण 24 परगना के अलावा हावड़ा, हुगली, झाड़ग्राम, कोलकाता और सुंदरवन समेत पश्चिम बंगाल के कई जिलों के प्रभावित होने की आशंका है। पश्चिम बंगाल के बाद यह तू‍फान बांग्लादेश की ओर बढ़ेगा और फिर कमजोर पड़ जाएगा। 

भारतीय नौसेना की तैयारी 
उधर, गृह मंत्रालय नियंत्रण कक्ष में हेल्पलाइन नंबर 1938 शुरू किया गया है। एनडीआरएफ ने 60 टीमों को तैनात किया है जबकि 25 टीमों को तैयार रखा है। हर टीम में 45 सदस्य होते हैं। वहीं भारतीय नौसेना ने राहत कार्यों के लिए पूर्वी तट पर छह पोतों को तैनात किया है जबकि पांच पोतों, छह विमानों और सात हेलिकॉप्टरों को विशाखापत्तनम में तैयार रखा गया है। नौसेना, तटरक्षक बल, सेना और वायु सेना के बचाव कर्मियों को तैनात किया गया है और केंद्र सरकार स्थिति पर करीबी नजर रख रही है। 

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