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इस 1 वजह से भय्यू महाराज के लिखने के बाद भी उनकी प्रॉपर्टी में सेवादार का कोई हिस्सा नहीं


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इस 1 वजह से भय्यू महाराज के लिखने के बाद भी उनकी प्रॉपर्टी में सेवादार का कोई हिस्सा नहीं
न्यूज डेस्क। अपनी दाईं कनपटी पर गोरी मारकर सुसाइड करने वाले भय्यू महाराज कई सवाल खड़े कर गए हैं। भय्यू महाराज ने मौत से पहले सुसाइड नोट लिखा। इसमें उन्होंने फैमिली में चल रही टेंशन को डिप्रेशन की वजह बताया था। इसी डिप्रेशन के कारण उन्होंने सुसाइड किया। भय्यू महाराज ने सुसाइड नोट के दूसरे पेज पर सेवादार विनायक के बारे में लिखा है। 

उन्होंने लिखा कि, 'विनायक मेरा विश्वासपात्र है। सब प्रॉपर्टी इन्वेस्टमेंट वही संभाले। किसी को तो परिवार की ड्यूटी करनी जरूरी है तो वही करेगा। मुझे उस पर विश्वास है। मैं कमरे में अकेला हूं और सुसाइड नोट लिख रहा हूं। किसी के दबाव में आकर नहीं लिख रहा हूं। कोई इसके लिए जिम्मेदार नहीं है।" हालांकि भय्यू महाराज के ऐसा लिखने के बाद भी कानून के तहत विनायक को उनकी प्रॉपर्टी में कोई हिस्सा नहीं मिल सकेगा। 

कितनी संपत्ति है भय्यू महाराज के पास
भय्यू महाराज के श्री सद्गुरु दत्त धार्मिक एवं पारमार्थिक ट्रस्ट की देशभर में 200 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति है। अगर सेवादार विनायक को उत्तराधिकारी बनाया जाता है तो वह 200 करोड़ की संपत्ति का मालिक हो जाएगा। भय्यू महाराज के महाराष्ट्र में 20 से ज्यादा केंद्र हैं। वहीं इंदौर में सुखलिया स्थित सर्वोदय आश्रम सहित महाराज के दो घर हैं। 10 से ज्यादा लक्जरी गाड़ियां हैं। 

क्या कहता है कानून
- हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 के तहत यदि कोई व्यक्ति मृत्यु से पहले वसीयत नहीं लिखकर जाता तो उसकी प्रॉपर्टी पर उसके कानूनी उत्तराधिकारी का हक होता है। 
- पहला हक पत्नी और बच्चों का होता है। 
- पत्नी और बच्चे भी नहीं होते तो फिर मां-बाप का हक होता है। 
- मां-बाप भी नहीं होते तो फिर भाई-बहन को प्रॉपर्टी में हिस्सेदार बनाया जाता है। 

विनायक को इसलिए नहीं मिल सकती प्रॉपर्टी
- भय्यू जी प्रॉपर्टी इन्वेस्टमेंट संभालने की जिम्मेदारी अपने सेवादार विनायक को देकर गए हैं, लेकिन विनायक उनकी प्रॉपर्टी का कानूनी उत्तराधिकारी नहीं बन सकेगा। 
हाईकोर्ट एडवोकेट संजय मेहरा ने बताया कि भय्यू जी ने जिस पेज पर यह बात लिखी है, उस पर हस्ताक्षर नहीं किए। 
- यदि वे हस्ताक्षर कर देते तो यह पेज वसीयत की श्रेणी में आ सकता था लेकिन हस्ताक्षर न होने से इसका कोई मूल्य नहीं रह गया है। 
- ऐसे में भय्यू जी के मामले में उनकी पहली पत्नी की बेटी, दूसरी पत्नी और उनकी बच्ची ये तीन लोग लीगल उत्तराधिकारी होंगे। 

कौन है विनायक
- 42 साल के विनायक दुधाले पिछले 16 साल से भय्यू महाराज के साथ हैं। भय्यू महाराज से जुड़ने से पहले वे इंदौर नगर निगम में पानी का टैंकर चलाते थे। 
- उनके दो बच्चे हैं। बीकॉम तक शिक्षित विानयक जिला अहमदनगर के रहने वाले हैं। वहां उनकी एग्रीकल्चर लेंड भी है। 
- बिजली के बिल, ड्राइवर की सैलरी के साथ ही सभी वीआईपी से मीटिंग का लेखा-जोखा भी विनायक रखते थे। 

क्या हैं वसीयत से जुड़े नियम
- वसीयत का कोई तय फॉर्म नहीं होता। एक सादे कागज पर भी वसीयत लिखी जा सकती है। 
- अगर पार्टनर के साथ जॉइंट प्रॉपर्टी है तो केवल उस प्रॉपर्टी की ही वसीयत की जा सकती है, जो वसीयत करने वाले के नाम है। 
- वसीयत किसी भी भाषा में की जा सकती है। इसमें स्टाम्प ड्यूटी अनिवार्य नहीं होती। 
- वसीयत में कभी भी और कितनी भी बार बदलाव किया जा सकता है। 
- वसीयत करवाने की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग करवानी चाहिए। वैसे कानूनी तौर पर यह जरूरी नहीं। 
- ऐसे दो लोगों को गवाह भी बनाना चाहिए जो आपकी हैंडराइटिंग और आपके हस्ताक्षर को पहचानते हों। 

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