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गणेश चतुर्थी 2017: जानें गणेश जी से जुड़ी ये अनोखी कथा


गणेश चतुर्थी इस बार 10 दिन के बजाय 11 दिन की है। जो 25 अगस्त से शुरू होकर 5 सिंतबर तक चलेगी। गणेश जी को विनायक, विघ्नेश्वर, गणपति, लंबोदर के नाम से भी जाना जाता हैं। हिन्दू धर्म के अनुसार किसी भी कार्य से पहले गणेश जी की पूजा की जाती है।


आप जानते है गणेश जी की जन्म से जुड़ी ये कथा:
प्राचीन कथा के अनुसार एक बार भगवान शंकर स्नान करने के लिए भोगवती नामक स्थान पर गए। उनके जाने के बाद माता पार्वती स्नान करने चलीं गई। स्नान से पहले उन्होंने अपने शरीर के उबटन से एक पुतला बनाया और उसका नाम गणेश रखा। अपने इस पुत्र को जान देकर द्वार पर पहरा देने का काम देते हुए उन्होंने कहा कि जब तक मैं स्नान करूं तुम किसी भी पुरुष को अंदर मत आने देना। इतना कहकर पार्वती जी स्नान करने चली गईं और गणेश पहरा देने लगे।
गणेश जी की जन्म से जुड़ी कथाइसी बीच भगवान शिव स्नान कर लौट आए और पार्वती के कक्ष में जाने लगे। द्वार पर बैठे एक नन्हें बालक ने उन्हें रोक दिया और युद्ध के लिए ललकारा। शंकर जी ने उसका परिचय मांगा तो उसने स्वयं को पार्वती का पुत्र बताया। इस बात को असत्य जान शिवजी क्रोधित हो गए और उन्होंने गणेश का सिर धड़ से अलग कर दिया।
ऐसे अनिष्ट से अनभिज्ञ पार्वती ने शंकर जी को क्रुद्ध देखकर सोचा कि भोजन में विलंब से वे नाराज हैं। वे दो थालियों में भोजन परोसकर ले आईं। शंकर जी ने पूछा कि ये दूसरी थाली किसके लिए लगाई है। पार्वती जी ने उत्तर दिया कि यह पुत्र गणेश के लिए है। मैंने अभी उसे अपने शरीर के उबटन से बनाया और नहाने जाने से पहले पहरे पर खड़ा किया है। पार्वती की बात सुन कर शिवजी ने कहा कि मैंने तो उसका सिर काट दिया है।